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नगर पालिका की करोड़ों की ज़मीन पर कब्ज़े का खेल

जिला संवाददाता सुखदेव आजाद

तिलभाण्डेश्वर बाल कल्याण समिति और सरस्वती शिशु मंदिर पर गंभीर आरोप

दूरदर्शन केंद्र के नाम की ज़मीन को पटाकर कर रहे समतलीकरण

जिला जांजगीर-चांपा
चांपा नगर पालिका परिषद की बेशकीमती ज़मीन एक बार फिर विवादों के भंवर में है। मामला तिलभाण्डेश्वर बाल कल्याण समिति और सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। आरोप है कि इन संचालकों ने न केवल नगर पालिका की ज़मीन पर स्कूल व कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़ा कर रखा है, बल्कि अब दूरदर्शन केंद्र के नाम पर आवंटित ज़मीन को भी कब्ज़ाने की साजिश रच रहे हैं तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी के कार्यकाल में नगर पालिका परिषद चांपा के प्रस्ताव पर दूरदर्शन केंद्र के लिए 40 से 45 डिसमिल ज़मीन आवंटित की गई थी। लेकिन समय बीतने के साथ यह जमीन स्कूल संचालकों के हाथों में चली गई और अब खेल आयोजन के नाम पर उसे समतल करने का कार्य जारी है।

स्कूल संचालक का बचाव

प्राचार्य का कहना है
हमारे विद्यालय में प्रांतीय स्तर का खेल आयोजन होना है। नगर पालिका से अनुमति लेकर अस्थायी तौर पर बाउंड्री वॉल हटाई गई है। अतिक्रमण या कब्ज़ा करने का हमारा कोई इरादा नहीं है।”

चांपा वासियों के ज़हन में उठते सवाल

1.नगर पालिका परिषद की भूमिका? – जब ज़मीन दूरदर्शन केंद्र को आवंटित थी, तो स्कूल संचालक किस आधार पर काम कर रहे हैं?

2.अतिक्रमण की बू – नगर पालिका की पहले से कब्जाई ज़मीन के बाद अब अतिरिक्त भूमि पर हाथ डालना खुला अतिक्रमण नहीं तो क्या है?

3.प्रशासन की चुप्पी क्यों? – न नगर पालिका और न ही ज़िला प्रशासन ने अब तक कोई स्पष्ट बयान दिया।

4.पहले भी हुए आयोजन – जब पहले खेल आयोजन होते रहे, तब यह ज़रूरत क्यों नहीं पड़ी?

5.क्या चल रही साज़िश? – क्या इस जमीन को स्थायी तौर पर स्कूल में मिलाने का षड्यंत्र है?

6.राजनीतिक सवाल – कांग्रेस पार्टी को क्यों चुप रहना चाहिए? अगर नगर पालिका की शासकीय ज़मीनें ऐसे ही बिकती गईं तो विकास कैसे होगा?

7.उप मुख्यमंत्री से जोड़? – क्या संचालकों ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव से जमीन की मांग करने की तैयारी कर ली है?

नगर पालिका परिषद पर दबाव

यह मुद्दा केवल ज़मीन का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। यदि यह अस्थायी उपयोग है, तो शर्तें और समय सीमा सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि अतिक्रमण की कोशिश है, तो प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर ज़मीन की रक्षा करनी होगी।

अन्यथा आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप लेगा और चांपा की शासकीय धरोहरें निजी हाथों में जाती रहेंगी।

नगर पालिका परिषद अध्यक्ष व सीएमओ को अब निर्णायक कदम उठाना ही होगा नहीं तो चांपा की जनता इस चुप्पी को माफ़ नहीं करेगी

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